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रोजगार की गारंटी खत्म कर जमींदारों को सस्ते में मजदूर उपलब्ध कराने का नाम है जी-राम-जी: वासुदेव शर्मा


मनरेगा (जीरामजी) श्रमिक संघ का गठन, राम कडोपे छिंदवाड़ा, अनिल उईके पाण्डुर्ना जिला अध्यक्ष बनाए गए

छिंदवाड़ा/ केंद्र राज्य सरकारों ने ग्रामीण गरीबों से रोजगार की गारंटी देने वाला मनरेगा कानून छीनने की तैयारी कर ली है, साल में 60 दिन मनरेगा के काम बंद रखने की व्यवस्था जमींदारों, बडे किसानों, ठेकेदारों, कंपनी मालिकों को सस्ते में मजदूर उपलब्ध कराने की गारंटी जी-राम-जी में दी गई है, जिससे स्पष्ट है कि भाजपा की सरकारें जमींदारों, पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है, मनरेगा में किए गए बदलाव इसका ताजा उदाहरण है। प्रदेश के लोकप्रिय श्रमिक कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा ने यह बात ग्रामीण मजदूरों की बैठक में बोलते हुए कही। दीन दयाल पार्क में हुई बैठक में ग्रामीण मजदूरों को संगठित करने के लिए मनरेगा (जीरामजी) श्रमिक संघ का गठन कर राम कडोपे को छिंदवाड़ा, अनिल उईके को पाण्डुर्ना जिला अध्यक्ष बनाया गया और 15 दिन में जिला कार्यकारिणी एवं ब्लाक कमेटियों का गठन करने का फैसला लिया गया। बैठक में राजू कुडापे, संतोष उईके, कृष्णा मांजरीवार, रामप्रसाद उईके, राजेश यादव, कलीराम उईके, राधेश्याम डेहरिया, मनोज घोरसे, बंटी वर्मा, एन कुमार धुर्वे, कमलेश उईके, कैलाश भारती सहित प्रमुख मनरेगा, खेत मजदूर शामिल रहे।
300 दिन काम एवं कलेक्टर दर पर 500 रूपए मजदूरी मिले
श्रमिक नेता वासुदेव शर्मा ने संगठन की मांगों पर चर्चा करते हुए कहा कि 11 साल से केंद्र में भाजपा की सरकार है, उसने मनरेगा में न काम के दिन बढाए और न ही मजदूरी में वृद्धि की, उल्टे मनरेगा को अघोषित रूप से बंद ही कर दिया था, जिस कारण गांव में मजदूरों को काम मिलना बंद हुआ और ग्रामीण गरीब शहरों की तरफ पलायन को मजबूर हुए, इसलिए अब हम लोगों को ग्रामीण गरीबों को उनके गांव में ही काम दिलाने का संघर्ष करना होगा जिससे वह अपने घर परिवार के साथ सम्मान से जीवन जी सकें।
श्रमिकों की मांगें पूरी कराने चलाएंगे अभियान
⚫ जीरामजी में परिवार के हर सदस्य को मांगने पर साल में 300 दिन के काम की गारंटी एवं कलेक्टर दर (500) रूपए प्रतिदिन मजदूरी दिए जाने की गारंटी की जाए!
⚫ ग्राम पंचायतों के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को न्यूनतम वेतन एवं शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
⚫ मनरेगा मस्टर आधारित रोजगार की गारंटी थी, इसलिए जीरामजी में काम करने वाले श्रमिक को “मस्टर मजदूर” होने की गारंटी दी जाए, जिससे उन्हें सरकार के चतुर्थ श्रेणी श्रमिक का अधिकार मिल सके।
⚫ महिला श्रमिकों को जीरामजी में 6 महीने की मजदूरी सहित मातृत्व अवकाश की गारंटी दी जाए, मनरेगा में महिला मजदूरों को यह अधिकार हासिल था।
⚫ काम नहीं मिलने पर मनरेगा श्रमिकों को 2,000 रूपए महीने भत्ते की गारंटी की जाए।
⚫ 60 साल से अधिक उम्र के मजदूरों को 5,000 रूपए महीना श्रमिक सम्मान पेंशन की गारंटी दी जाए।
⚫ प्रत्येक मनरेगा श्रमिक परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की गारंटी दी जाए, जिससे उनके परिवार भी आर्थिक विपन्नता से बाहर निकलकर आर्थिक समानता के अधिकार को हासिल कर सकें।
⚫ मनरेगा को खेती से जोडा जाए, किसानों को मांगने पर ग्राम पंचायत श्रमिक उपलब्ध कराए, मजदूरी का समय पर पूरा भुगतान हो, इसकी गारंटी जीरामजी में दी जाए।
रोजगार मांगने की कानूनी गारंटी खत्म, अब राम भरोसे चलेगी मनरेगा
श्रमिक नेता वासुदेव शर्मा ने कहा कि मनरेगा मजदूर के लिए मस्टर आधारित मांगने पर रोजगार की गारंटी थी, जीरामजी में सरकार तय करेगी कि काम देना है या नहीं, कहां देना है कहां नहीं देना, कब देना है कितना देना है, यह सब सरकार तय करेगी, इस तरह मजदूर के मांगने की कानूनी गारंटी खत्म कर दी गई है, इतना ही नहीं मनरेगा में मजदूरी का 100% भुगतान केंद्र सरकार को करना होता था, जीरामजी में केंद्र सरकार 60% मजदूरी देगी यानि 40% मजदूरी की राशि कम करके राज्यों पर छोड दी गई है और राज्य पहले से ही आर्थिक संकट में है, इसलिए वह 40% राशि नहीं देंगे, तब केंद्र का भी 60% नहीं मिलेगा, इस तरह सरकार ने जीरामजी में श्रमिकों से काम मांगने की पूरी गारंटी छीन ली गई, इसलिए जीरामजी का विरोध पूरी ताकत से ग्रामीण गरीबों मजदूरों को करना होगा, तभी काम की गारंटी को बचाया जा सकता। शर्मा ने बैठक में उपस्थित लोगों से मनरेगा श्रमिक संगठन बनाने में एक दूसरे का सहयोग करने की बात कही, मजबूत संगठन और जुझारू संघर्ष ही सरकार को श्रमिक विरोधी निर्णय वापस लेने पर मजबूर कर सकता